गज़ल

सबकी सदाऐँ मुकाम तक.
कँहा पहुँच पाती हैं,
बावजूद हजार कोशिश,
गूँज बनके लौट आती हैं।
नसीब सबके जुदा होते हैं,
क्या जरूरी ,सबके ख्वाब,
पूरे होते हैं।

बार बार इल्तिजा का असर.
बेअसर होता है,
पत्थर दिल से प्यार,
बस भरम होता है।
प्यार, मोहब्बत, दरदे लफज,
बेमानी होते हैं,
तलख लफ्जों से ,जब,
सारोकार होता है।
मैं समझा लेता हूँ दिल को
इस तरह,
ये बातें आम हैं,
क्यूँ जार जार रोता है।
आस कर कि वक्त ऐसा भी ,
आता है,
तिनका देके सहारा,
डूबने से बचाता है।
दिन बदल जाते हैं,
कुछ इस तरह,
कि पतझड़ बहार,
बन जाता है।
उम्मीदे दामन न छोड़,
कायम रख भरोसा,
कि उजड़ा चमन भी कभी,
गुलजार बन जाता है।

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वाह गर्मी

गर्मी के भी हैं खूब मजे,
इसकी भी हैं कई वजह।
कोल्ड ड्रिंक का लुत्फ उठाओ
आम का मौसम ,जी भर खाओ।

तरह तरह के शेक बनाओ,
भाँग घोट ठंडाई बनाओ।
फ्रूट जूस से हेल्थ बनाओ
शरबत पी के तर हो जाओ।

गर्म कपड़ों का पीछा छोड़ो,
कूलर ऐसी से नाता जोड़ो।
हिल स्टेशन पे सैर को जाओ,
शोपिंग का कुछ लुत्फ उठाओ।

रात छोटी,दिन बड़े हो गए,
काम निबटना सरल हो गए।
लम्बी छुट्टी ,पीहर जाओ,
मात पिता से मिलकर आओ।

अपने दिल की कुछ कह आओ,
बे फिक्री से मिल कर आओ।
ताक पे रखदो जिम्मेदारी
झाड़ू पोचा ,खाने की तैयारी।

गर्मी के भी गुणगान करो,भई इसका भी सम्मान करो,
ये गर्मी ही भाप बनेगी,
वर्षा का सामान बनेगी।

देश भक्ति(कव्वाली)

[16/5,/2018: देश भक्ति(कव्वाली)
केवल सीमा पर मर जाना,
देश भक्ति नहीं होती।
देश के हित का कोई काम,
देश भक्ति ही होती है।
आआआआ……..।
जो देश के हित मे काम करे.
वो सच्चा हिन्दुस्तानी है।

जीतेजी देश का नाम करे
वो सचमुच हिन्दुस्तानी है।।

आआआआआआ
आओ कुछ ऐ सा काम करें
भारत का ऊँचा नाम करें op
कुछ ऐसी कोशिश कर पाऐं,
भारत की शान में चाँद बने।
भारत की शान मे चाँद बने
हम सबने मन मे ठानी है।
१..आआआआ

जो देश के……………।
मैंने भारत मे जन्म लिया,
कुछ इसका मूल्य चुका पाँऊ।
कन्या भ्रूण की,अब,न हत्या हो
कुछ ऐसा करके दिखलाऊँ..

कुछ ऐसा करके दिखलाऊँ
मैंनेभी मन मे ठानी है

जो देश के…………..।

आआआआ

2.. मै बन के भारत का सैनिक,
भारत की शान बढ़ाऊंगा।
सीमा पे डट तैनात खड़ा,
दुश्मन के छक्के छुड़ाउँगा।
मैं झुकूं नहीं ,मैं रुकू नही2
ताकत को झोँक दिखानी है।
जो देश……….

आआआआआआआ
3…सीमा पर सैनिक बलिदान हुए,
परिवार पे संकट छोड़ गये।
उनके बच्चों की कुछ जिम्मेदारी लूँ,
जिन्हें बीच राह मे छोड़ गये..

ये बात न कतई भुलानी है
ये बात न कतई भुलानी है।

जो देश के……….

आआआआआआ

3..रिश्वत और कालाबाजारी,
जड़मूल से ऐसे निकाल पाऊँ
दुस्साहस ,दोषी न और करे.
ऐसे प्रयास मैं कर पाऊँ..

ऐसे प्रयास मैं कर पाऊँ
न चल पाऐ मनमानी है।

जो देश…………।

आआआआआआआ
4…कुछ ऐसे कदम उठाऊँ मैं

कन्या से ,नारी तक की रक्षा हो।
महफूज रहे दारिन्दों से,
कुछ ऐसी कला और शिक्षा हो
मेरे देश की ऐसी नारी हो,
मानो हो झाँसी की रानी..2

जो देश के हित मे काम करे,

वो सच्चा हिन्दुस्तानी है।

द्वारा:-
मंजुला माथुर
17.5.2018

होली           ______टेसू फूल उठे जंगल मे,रंगों का त्यौहार मनाने।विदा हो गई शरद हवाएँ,फागुन को रस्ता दिखलाने।आई होली रंग रंगीली,तन मन को रंगीन बनाने,ढोल मंजीरों की तानों पे,मदमस्ती के गीत सुनाने।वृन्दावन ,बन गया रँगीला रंग भरे सब झूम रहे,होली के हुलियारे देखो,गली गली में घूम रहे।रंगों की वारिश से भीगा,  धरती से आकाश तलक,रंग गुलाल के उड़ते बादल,दिखलाते क्या खूब झलक।पनघट की ये गीली फिसलन, चौबारों तक आ पहुंची।झीनी चुनर से झाँकती गोरी,हवा झरोखे जा पहुंची।रसिया के संग संग हमजोलीमचा रहे बृजगाँव मे होली,कैसे बच पाऐं नर नारी,उड़ा रहे रंग ,भर भर झोली।मार रहे भर भर पिचकारी,वृन्दावन के नटखट रसिया,नई नवेली चुनर ओट से,देख रही अपने मन बसिया।          मंजुला माथुर की ओर से—-        होली की शुभकामनाएं

नव वर्ष  2018 

नव वर्ष की सुंदर बेला है,

उमंग से भरा सवेरा है,

रंग विरंगे फूल खिले हैं, 

उषा का रंग अलबेला है।
कोयल ने भी स्वर  ताना है,

नव वर्ष का गीत सुनने को,

पूरा जग ही झूम उठा,

नए साल की खुशी मनाने को।
बाल सूर्य की लाल लालिमा

धीमे धीमे झांक रही,

उषा काल की हर एक उर्मी, शरमाती, ओट से ताक रही।
21 सदी का वर्ष अठारह,

मतवाला से उतर रहा,

यौवन का अहसास कराता,

दौर क्षितिज से सरक रहा।
दुनियाँ के हर कोने में,

मच हुआ खुशियों का शोर,

नए साल का नया सवेरा,

खींच रहा है ,अपनी ओर।
नव वर्ष का स्वागत करने,

आतुर है सारा संसार,

उमंगों से गूँज उठे हैं,

चारों दिशा के ,चारों द्वार।
स्वागत ,स्वागत, स्वागत के स्वर,

देते यही दुहाई हैं,

नूतन वर्ष की नूतन बेल,

सूरज के रथ पर आई है।.