Bubbles in mind

Bubbles in the mind

Appear,disappear
In no time

Scattering in the air,
Reflecting seven colours
Moving without care
Here and there
Or Anywhere

Not stable,beyond reach
Sea-shore waves
As in the beach

Recatching in vein
And again to keep
Trying hard,
Breathing deep.

Whirling,parishing
Now no more
Just as life
At every door.

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ग़ज़ल

हम बेबात ,तेरी राह ,क्यों तकते रहे
ख्वामख्वाह, बेखुदी मे बहकते रहे
तेरे तक पहुंचने की चाहत में
क्यूँ वीरानियों में ,भटकते रहे।

आगाज ही देखा किये
अंजाम पे तवज्जो न की
कयों नादानियों को न समझा
नादानी दर,नादानियाँ की।

मेरी कुरबानियों को
इतने हल्के में लिया
मेरी साफगोई तक को
बेअक्ली का नाम दिया

बेरुख़ी तेरी आदत सही
मैं बदल जाऊं, मेरी फितरत नहीं
ए!ज़माने, बड़ी देर में तुझे समझा
ये मेरी चूक और,गलती सही।

अब फूंक के कदम रखने से क्या
बाद ग़म के पछताने से क्या
बहार चुपके से चली गईं
खिजां में अश्क बहाने से क्या

प्यार, वफा, ईश्क, सब लफ्ज़ बेमानी हैं
अब मुहब्बत का बयां, गोया कहानी है
दफन करदी ज़मीं मे ,बीते वक्त की बातें
छोड़ आया बहुत दूर, हसरतों, की बातें।

करवा चौथ

मेरी एक प्यारी पड़ौसन थी
भूख कतई न सहती थी
आता करवा चौथ उपवास

.
दिन भर करती चांद की आस

घर मे बने सारे पकवान
ललचाते थे बारम्बार
भूखे पेट ,खुशबू की मार
राल टपकती ,कितनी बार

बात है पति की,लम्बी उम्र की
कैसे भी सब्र, करना होगा
सब सखियों के बीच बैठ
सब्र का दम भरना होगा

एक बार इत्फाक तो देखो
दस बजे तक चांद नहीं निकला
भूख से बेहाल ,हुई पड़ौसन
मुख हुआ फीका फीका

बादल ने धोखा दे डाला
चाँद को करके अपनी ओट
पड़ौसन ने भी वो कर दिखाया
मारी हो जो चोट पे चोट

साजन को छत से आवाज लगाई
पूजा की थाली भर लाई
मेरे देव!तनिक झुक जाओ
गंजी चाँद पे न शरमाओ

इसे देख खोलूँ उपवास
मेरा चाँद है मेरे पास
झट गंजे सर पे ,ताजा जल डालाlink
गंजी चाँद को जल दे डाला

ऊपर का चाँद ,जरा इतराता है
नाहक शान दिखाता है
उपवास छौड़ ,झट खाना खाया
ऐसा करतव कर दिखलाया

गंजी चाँद का ,ऐसा उपयोग
हैरान से रह गये, सारे लोग।
द्वारा
मंजुला माथुर

एहसास

एहसास
________
ए!,खुदा हमने ऐसा भी देखा है,
दिल मे हँसते हैं लोग,
सिर्फ आँखों से रोते देखा है
फर्क समझा ,जब तलक,
देर हो चुकी थी,
क्या खाक होता पछताने से
जब जिन्दगी साँस गिन रही थी।

कल तक अपने होने का दावा किया,
आज पराये बन गए।
मेरे यार ये दुनिया है,
वफादारी रास न आई शायद.
फरेबी बन गए।

प्यार का दम भरनेवाले ही,
प्यार से मुंह मोड़ चले।
कल हाथ मे हाथ डाल चले,
आज प्यार का हर कतरा ,
निचोड़ चले।

वक्त ऐसा आया ,खुदा की तौबा,
कि गैरौ का न आऐ,
हमारे हाल पे हँसते वहीं हैं,
दिन रात जिनके लिए ,अश्क बहाए।

किसी पे बस नही चलता,

बेबसों का शिकार करते हो.
मजबूतो से कुछ कहा नहीं जाता
मजबूरो पे सितम करते हो।

बेदखल हुए बहारों से,
वीरानों ने साथ दिया।
खुशियां राहों मे छोड़ चलीं
गमों ने दामन थाम लिया।

इन्तहा होगी कभी तो,
बेइन्तहा तकलीफों की,
हर कदम चलते रहे,
इक आस ले तकदीरों की।

जरूरी नहीं सबको मुहब्बत रास आए
बागो के हर दरख्त पे बहार आए
हर कली खिल के गुलजार हो जाए।
साज का हर तार झंकार हो जाए

सब अपना अपना
नसीब जीते हैं,
किसी के हाथ भरे होते हैं.
किसी के रीते रहते हैं।

जब नसीब लिखा मेरे खुदा ने,
खुश नसीबी का सफा कोरा रहा,
खुशनसीबी को जब जब ढूँढा
सिर्फ वक्त बरबाद किया।

इस आस मे गुजार दी उम्र,
कभी रहमे खुदा होगी
भूल कर ही सही,
रहमत हमको अता होगी।

न आया कभी वो जमाना,
जमाना हो गया आस करते।
क्या खाक जिन्दगी जी,
कि मर गये जिन्दगी के चलते।

..रुबाईयाँ

खामोशियों की भी आवाज होती है
जो फकत दिल को सुनाई देती है
लबों पे न आ पाते हैं जो अल्फाज,
वजह उनकी भी कुछ खास होती है।

मौजौं की रवानी मे बह गए हैं जो किस्से
मेरी जिन्दगी के थे अहम हिस्से।
सैलाब वक्त का इतना तेज और ज्यादा था,
गोया वजीर की चाल के आगे पियादा था।

मेरे चेहरे पे,जो लकीरें हैं मुसर्रत की
छुपा रखीं हैं उनमें तकलीफेंं अधूरी हसरत की।
मेरे चेहरे को ताउम्र न पढ़ पाओगे
जज्ब है जो न ढूंढ पाओगे

कुरेद के देख लेना ,बाबजूद यकीनन,
दिल के जज्बातों का,
हरगिज पता न पाओगे।
उभर के न आ आएगा सीने का गम,
नुमायां न होने देंगे ,
जंहाँ वाले की कसम।
सब्र से रोक रखें हैं, बेआस जिन्दगी के फसाने।
गर्क करके जिन्हें हो गए हैं जमाने।.