इम्तिहान-ए-जिन्दगी

इम्तिहान-ए-जिन्दगी
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जिन्दगी के इम्तिहान में
हर कोई पास नहीं होता
बावजूद हजार कोशिशें
कामयाब नहीं होता |मैंने चाहा,खुश रखू,
हरेक को,हर हाल में
नतीजा क्यूँ कर,
वरखिलाफ ही होता ।रूठ जाता है मुझसे
अपना ही रफीक
क्या यही है खुदा मेरा
कलाम-ए-नसीब ।अपने दिल की कहूँ तो,
ताले जुबां पे लग जाते है
लफज आवाज़ बनने से
जाने क्यूँ, कतराते हैं।कौन सी शय रोकती है मुझे
कि किससे घबरा जाती हूँ
कुछ तो कमी है मुझमें
मै यूँ क्यूँ ,हार जाती हूँ।कितनी मर्तबा सोचा कि
इस बार चुप्पी तोंङूगी
जहन में चलती बेतरतीबी को
सिलसिलेवार जोड़ूगी।रवां कर दूँगी ,जहन में
रुके सैलाब को
जिगर में तिल तिल के
रिसते से,रिसाव को।जरा सी हिम्मत अता कर दे
खुदा मेरे
तोङ डालूंगी,जुबां पे लगे
हर पहरे।वगरना घुट के,न बीत जाये
ये जिन्दगानी
खुलासा करके ही रहूंगी
जिन्दगानीकी कहानी ।

सुहाग पर्व करवा चौथकरवा

hसहनशीलता का इम्तिहान

नारी के त्याग का सुरमय गान

प्यास भूख कुछ नहीं सूझती

रीझे पिया बस यही सोचती

मेरी उम्र भी लग जाए पिया

जलता रहे तेरी आयु का दिया

तेरे नाम की मेंदही चराई

पहन चुनर सजधजं के आई

सारी शोभा,सब श्रिंगार

पिया उम्र का ही आधार ।

धन्यधन्य भारत की नारी

बनी रहो प्रियतम की प्यारी

17-10-19

हिन्दी भाषा

मेरी राष्ट्रभाषा जो हिन्दी है

भारत माँ के माथे की बिंदी है

क्यों अंग्रेजी सर चढ बोल रही

भाषा की गुलामी तोल रही ।

अंग्रेजों से तो आजाद हुए

अंग्रेजी अब तक क्यों जकडे है

भौगोलिक सीमा से स्वतंत्र हुए

मन सीमा अब तक क्यों जकडे है

कितनी तुम इंगलिश पढ जाओ

निज भाषा पहले अपनाओ

इसका मन से सम्मान करो

माँ समझ हिन्दी को प्यार करो।

हिन्दी के गुण इतने अद्भुत है

शायद हम सबको ग्यात नहीं

ये निरी वैज्ञानिक भाषा है

मिलते ढेरों अपवाद नहीं

जैसा बोला ‘वैसा ही लिखा

स्पेलिंग रटना काम नहीं

कोई भाषा हिन्दी में लिख लो

जब चाहो मजे से ,जब पढलो।